55 हजार करोड़ की बंदर हीरा खदान लेने अडानी, बिड़ला और रूंगटा में देर रात तक चलता रहा घमासान

छतरपुर जिले के 55 हजार करोड़ रुपए से अधिक कीमत के बंदर हीरा प्रोजेक्ट की मंगलवार की सुबह 11 बजे से ऑन लाइन नीलामी शुरू हुई। इस हीरा खदान को लेने के लिए देश की बड़ी कंपनियों अडानी, बिड़ला और रूंगटा ने बोली में हिस्सा लिया। देर रात तक कंपनियों में हीरा खदान लेने के लिए घमासान चलता रहा।

खनिज विभाग ने हीरा खदान के संसाधन मूल्य (55 हजार करोड़ रूपए) का 5 फीसदी राशि यानी की 2750 करोड़ रूपए आधार मूल्य तय किया था। कंपनियों ने इससे .05 प्रतिशत बढ़ाकर बोली लगाना शुरू किया, जो शाम सात बजे तक 30.50 फीसदी पर पहुंच गई। कंपनियों के बोली लगाने का क्रम देर रात तक जारी रहा।

सरकार ने बंदर खदान हीरा खदान नीलामी की निविदा सूचना 5 जुलाई को जारी की थी, इसमें करीब चार माह के लिए कंपनियों को खदान परीक्षण, टेंटर शर्तों का परीक्षण और निविदा में हिस्सा लेने का समय दिया था।

निविदा में आधा दर्जन से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन तकनीकी निविदा में सिर्फ तीन कंपनियों को ही योग्य पाया गया। इसके चलते अन्य कंपनियों के इससे बाहर हो गई। इन कंपनियों ने हीरा खदान की न्यूनतम कीमत की पांच फीसदी राशि जमा करने के बाद आज ऑन लाइन बोली में हिस्सा लिया।

छतरपुर में 3.50 करोड़ कैरेट के भंडारण का अनुमानित मूल्य 55 हजार करोड़ आंका गया है। हीरा उत्खनन के लिए इन कंपनियों की नेटवर्थ कम से कम 1100 करोड़ रूपए होना जरूरी है। खनिज विभाग ने हीरे में 12 प्रतिशत रायल्टी तय की है।

हर पांच मिनट में बढ़ती गई बोली-

सुबह 11 बजे शुरू हुई बोली में हर पांच मिनट पर प्रतिस्पर्धी कंपनियां कीमत बढ़ाकर बोली लगाती रही। बोली की शुरूआत आधार मूल्य के 5 प्रतिशत से बढ़कर 5.05 फीसदी से शुरू की गई थी। बोली ऑन लाइन लगाई गई है इसके चलते यह पता अधिकारियों तक को नहीं लग पाया कि बोली की शुरूआत किसने की और इसके बाद किस-किस कंपनी के बीच में देर रात तक प्रतिस्पर्धा जारी रही ।

तीन घंटे था बोली का समय पर 10 घंटे में भी नहीं हुई समाप्त

वैसे तो हीरे की बोली के लिए सरकार ने तीन घंटे (11 बजे से दोपहर एक बजे तक) का समय तय किया था, लेकिन 10 घंटे में भी यह नहीं समाप्त हुई। दर असल सरकार ने यह शर्त रखी थी कि बोलीकर्ता को प्रत्येक बोली में आधार मूल्य का .05 फीसदी राशि बढ़ाकर बोली लगाना है। इसके अलावा अगर 8 मिनट तक अगर कोई बोली नहीं लगाता है तो वहीं से बोली अपने आप बंद हो जाएगी। कंपनियां हर पांच-सात मिनट में बोलियां लगा रही हैं, जिससे यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।

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