राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, सरकार जल्द तारीख तय करने की मांग करेगी

नावी माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट आज अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले की अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर सकता है. मामले की सुनवाई से पहले की सभी जरूरी कार्रवाई पूरी हो चुकी है. ऐसे में ये उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द कोर्ट अयोध्या मामले की विस्तृत सुनवाई शुरू कर देगा.


सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच आज सुबह करीब 11 बजे मामले को सुनेगी. सरकार का कहना है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त करेगी कि वह जल्द से जल्द इसपर सुनवाई करे.


शुक्रवार को नए मामलों की सुनवाई का दिन होता है. इसलिए, तेज़ी से सुनवाई होती है. ऐसे में आइटम नंबर 7 के तौर पर सूचीबद्ध अयोध्या केस की भी लंबी सुनवाई नहीं होगी. ये सुनवाई खास तौर पर मामले की विस्तृत सुनवाई शुरू करने की तारीख तय करने के लिए ही हो रही है.


ऐसे में कोर्ट इस बात का एलान कर सकता है कि सुनवाई के लिए विशेष बेंच किस दिन बैठेगी. मामले से जुड़े पक्ष कल कोर्ट से ये मांग भी करेंगे कि इसकी लगातार सुनवाई की जाए. एक तय समय सीमा में सुनवाई खत्म की जाए.


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हालांकि, यहां ये समझना जरुरी है कि अब तक अयोध्या मामले की सुनवाई 3 जजों की बेंच ने की है. कल मामला 2 जजों की बेच के सामने लग रहा है. ऐसे में ये बेंच अगली तारीख का तो एलान कर सकती है. लेकिन उसके ये कहने की उम्मीद नहीं है कि 3 जजों की जो बेंच अगली तारीख को मामला सुनेगी, वो उसे किस तरह से सुने.


संभावना यही है कि इस सवाल को अगली बेंच पर छोड़ दिया जाएगा. बेंच के सदस्य कौन-कौन होंगे, ये भी कल नहीं तय नहीं होगा. अगली सुनवाई से पहले जब लिस्ट जारी होगी, उसी से इस बात का पता चल सकेगा.


8 साल से लंबित है मामला
30 सितंबर 2010 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया था. हाईकोर्ट ने विवादित जगह पर मस्ज़िद से पहले हिन्दू मंदिर होने की बात मानी थी. लेकिन ज़मीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का आदेश दे दिया था. इसके खिलाफ सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. तब से ये मामला लंबित है.


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मामले में देरी को देखते हुए आरएसएस, शिवसेना, वीएचपी और संत समाज के एक वर्ग ने कानून लाने की मांग की है. हालांकि सरकार का कहना है कि हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का इंतजार करना चाहिए. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अध्यादेश की मांग को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था, “राम मंदिर पर हमारी सरकार अध्यादेश नहीं लाएगी. कानूनी प्रक्रिया के बाद ही राम मंदिर पर फैसला किया जाएगा. राम मंदिर को लेकर जब तक कानूनी प्रक्रिया चल रही है तब तक अध्यादेश लाने का विचार नहीं है.”

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