भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों नहीं बचाया था अभिमन्यु को जानिए हैरान कर देने वाला रहस्य

दोस्तों चंद्रमा ने एक बार देवताओं के सामने एक शर्त रख दी थी। वह शर्त यह थी कि उसका पुत्र ज्यादा समय तक पृथ्वी पर नहीं रहेगा। और भगवान श्री कृष्ण के मित्र देवराज इंद्र के पुत्र अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु के रूप में जन्म लेगा और वह भगवान कृष्ण और अर्जुन की अनुपस्थिति में अकेला ही अपना पराक्रम दिखाता हुआ वीरगति को प्राप्त होगा। जिसमें तीनों लोकों में उसके पराक्रम के प्रशंसा हो।

इसके साथ ही चंद्रमा ने यह शर्त भी देवताओं के सामने रख दी थी। की अभिमन्यु का पुत्र ही उस कुरु वंश का उत्तराधिकारी होगा। दोस्तों देखा जाए तो पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर थे। इसलिए नियम अनुसार ही उन्हें राजा बनाया गया था। और नियम अनुसार युधिष्ठिर का ही जेष्ठ पुत्र उनके राज्य तथा उनके वंश का उत्तराधिकारी हो सकता था। और फिर अर्जुन का पुत्र उस वंश का उत्तराधिकारी कैसे बन सकता था।

और फिर वह चंद्रमा के सारी शर्तें मान ली थी। तब चंद्रमा के पुत्र ने अभिमन्यु के रूप में जन्म लिया था। और द्रोणाचार्य द्वारा रचे गए चक्रव्यूह में अपना तीनों लोकों में प्रशंसनीय पराक्रम दिखाकर अल्पआयु में ही वीरगति को प्राप्त हो गया था। दोस्तों इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अभिमन्यु को नहीं बचाया था।

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