पृथ्वी के बाद क्या ये ग्रह बनेगा मनुष्यों का नया घर,क्लिक कर खुद ही जान ले

दोस्तों आज हम मंगल ग्रह के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसे धरती के बाद मनुष्य का दूसरा बसेरा भी कहा जाता है। रेड प्लैनेट के नाम से जाना जाने वाला ये ग्रह ठंडा तथा वीरान पर हुआ है। लेकिन वैज्ञानिकों को इस ग्रह पर प्राचीन नदियां,समुद्र तथा झीलों के अवशेष मिले है। आज हम एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ रहे हैं जिससे ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि हम आने वाले कुछ दशकों में मंगल ग्रह पर मानव बस्तियां बसा लेंगे।

तो दोस्तों इस आर्टिकल को आप जरूर पढ़े ताकि आप संभावनाओं से भरे इस अद्भुत ग्रह के बारे में और भी अच्छे तरीके से जान सके। माना जाता है कि इटली के खगोल विद गैलीलियो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पहली बार पृथ्वी से मंगल ग्रह को देखा था। उन्होंने एक दूरबीन की सहायता से इस ग्रह को देखा था, जिसके बाद 1659 में डच के खगोल वैज्ञानिक ने एक उन्नत दूरबीन का उपयोग कर मंगल ग्रह को देखा था। मंगल ग्रह को उसका नाम रोमन सभ्यता के गॉड ऑफ वार से मिला है पर और भी कई प्राचीन सभ्यताओं में इस ग्रह का जिक्र मिलता है। मंगल ग्रह सूर्य से चौथा और सौरमंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है। वैज्ञानिकों को इस ग्रह पर कुछ नई घाटियां पहाड़ियां और पठार भी मिले हैं। मंगल ग्रह का उपरत्न आईरन ऑक्साइड से बना हुआ है जिसके कारण काइस ग्रह का रंग गहरा लाल है। अपने लाल रंग के कारण ये ग्रह रेड प्लेनेट के नाम से भी जाना जाता है। मंगल ग्रह एक अंडाकार ऑर्बिट में सूर्य का चक्कर लगाता है तथा सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 687 दिनों का समय लग जाता है।

मंगल ग्रह के पास कुछ दो प्राकृतिक उपग्रह मौजूद है जिन्हें फोबोस तथा डेमोस के नाम से जाना जाता है सौर मंडल में अपने ग्रह से सबसे कम दूरी में चक्कर लगाने वाला प्राकृतिक उपग्रह मंगल की सतह से दूरी मात्र 6000 किलोमीटर है जबकि हमारी पृथ्वी तथा चंद्रमा की दूरी लगभग 384000 किलोमीटर है। इन दोनों ही उपग्रहों की गिनती सौरमंडल के सबसे छोटे उपग्रहों में की जाती है पर इन दोनों उपग्रहों के निर्माण में वैज्ञानिकों को अचरज में डाला हुआ है। कुछ का मानना है कि यह उपग्रह मंगल ग्रह से टूटकर बने हुए हैं जबकि कुछ का मानना है कि दोनों शुद्र ग्रह है जो कि मंगल ग्रह के पास से गुजरते समय इसके गुरुत्वाकर्षण में आकर इसका चक्कर लगाने लगे।

मंगल ग्रह काफी हद तक पृथ्वी के समान ही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह भी काफी हद तक पृथ्वी जैसा रहा होगा। एक अध्ययन के अनुसार वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर हीरो के सबूत मिले हैं। इसके बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर कभी पानी मौजूद रहा होगा तथा यहां का एनवायरनमेंट आज के मुकाबले काफी ज्यादा अच्छा था जो कि जीवन को संभव बनाने के लिए बिल्कुल अनुकूल था। हालांकि अभी तक किए गए खोज में वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर जीवन होने के सबूत नहीं मिले हैं पर वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह लाखों साल पहले या एक हरा भरा ग्रह रहा होगा क्योंकि तब इस ग्रह पर पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद रहे होंगे और इसी वजह से दुनिया भर के तमाम एजेंसियां दिन रात एक कर इस ग्रह पर जीवन की तलाश कर रही है।

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